(N/A) $1901$ में,ह्यूगो डी व्रीस ने इवनिंग प्रिमरोज़ ($Oenothera$ $lamarckiana$) पौधे पर प्रयोग किए और उत्क्रांति का उत्परिवर्तन सिद्धांत प्रस्तावित किया।
यह सिद्धांत बताता है कि उत्क्रांति आबादी में होने वाले अचानक और बड़े अंतर (उत्परिवर्तन) के कारण होती है।
उनका मानना था कि उत्परिवर्तन ही उत्क्रांति का मुख्य कारण है,न कि वे छोटी आनुवंशिक विभिन्नताएं जिनके बारे में डार्विन ने बात की थी।
उत्परिवर्तन यादृच्छिक (random) और दिशाहीन होते हैं,जबकि डार्विनियन विभिन्नताएं छोटी और दिशात्मक होती हैं।
डार्विन के लिए उत्क्रांति एक क्रमिक प्रक्रिया थी,जबकि डी व्रीस का मानना था कि उत्परिवर्तन से प्रजातिकरण (speciation) होता है,जिसे उन्होंने 'साल्टेशन' (एक ही चरण में बड़ा उत्परिवर्तन) कहा।
बाद में जनसंख्या आनुवंशिकी (population genetics) के अध्ययनों ने इन तंत्रों पर और अधिक स्पष्टता प्रदान की।